
कोरबा। हितवाद टाइम्स -विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से टिकट की दावेदारी को लेकर सामने आ रही नई आर्थिक शर्तों ने राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्रों में सवाल खड़े कर दिए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की प्रस्तावित व्यवस्था के तहत विधानसभा टिकट के दावेदार को पार्टी फंड में ₹2 लाख रुपये जमा करने के साथ अपने बैंक खाते में ₹20 लाख रुपये की राशि दिखाना आवश्यक होगा। ₹2 लाख की राशि को नॉन-रिफंडेबल बताए जाने की भी रिपोर्ट है।
इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अधिवक्ता धनेश कुमार सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव लड़ने और जनता का प्रतिनिधित्व करने का आधार केवल आर्थिक क्षमता नहीं, बल्कि जनसेवा, जनसमर्थन, सामाजिक स्वीकार्यता, ईमानदार छवि और क्षेत्र के प्रति प्रतिबद्धता होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास करोड़ों रुपये नहीं हैं, लेकिन वह वर्षों से जनता के बीच रहकर सामाजिक कार्य कर रहा है और उसे क्षेत्र की जनता का समर्थन प्राप्त है, तो क्या केवल आर्थिक स्थिति के आधार पर उसकी राजनीतिक दावेदारी कमजोर मानी जानी चाहिए?
धनेश कुमार सिंह ने कहा कि ₹2 लाख की गैर-वापसी योग्य राशि और खाते में ₹20 लाख दिखाने जैसी शर्तें लागू करने से आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन योग्य और जनाधार वाले लोगों के लिए राजनीति में प्रवेश कठिन हो सकता है। इससे यह सवाल भी उठता है कि राजनीतिक दलों में उम्मीदवार चयन का आधार जनसेवा और जनाधार होना चाहिए या आर्थिक क्षमता?
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को ऐसे नियम बनाने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसान, मजदूर, छोटे व्यापारी, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और सामान्य मध्यमवर्गीय परिवारों से आने वाले योग्य लोगों के लिए भी राजनीति में समान अवसर उपलब्ध रहें।
धनेश कुमार सिंह ने कहा कि यदि किसी पार्टी को चुनावी खर्च या संगठन के लिए आर्थिक योगदान लेना है, तो उसके लिए पारदर्शी एवं समान व्यवस्था हो सकती है, लेकिन टिकट की दावेदारी को सीधे आर्थिक क्षमता से जोड़ना लोकतांत्रिक भागीदारी पर गंभीर बहस की मांग करता है।
उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से मांग की कि इस प्रकार की आर्थिक पात्रता संबंधी व्यवस्था पर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट स्थिति रखी जाए, नियमों और उनके उद्देश्य को पारदर्शी बनाया जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि धन के अभाव में कोई योग्य और जनसमर्थित व्यक्ति राजनीतिक अवसर से वंचित न हो।राजनीति जनसेवा का माध्यम है, केवल आर्थिक सामर्थ्य प्रदर्शित करने का मंच नहीं। लोकतंत्र में टिकट की दावेदारी की कसौटी जनता का विश्वास और उम्मीदवार की सामाजिक स्वीकार्यता भी होनी चाहिए।




