सुरक्षित मातृत्व के लिए गर्भवती महिलाओं की समय पर जॉंच एवं संस्थागत प्रसव जरूरी

गर्भवती की कम से कम चार नियमित प्रसवपूर्व जांच(ए.एन.सी) कराना जरूरी है। शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में हर महीने की 9 एवं 24 तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में जांच की सुविधा उपलब्ध है। जांच में रक्तचाप(बीपी) हीमोग्लोबिन(एचबी), पेशाब, सिकल सेल सहित आवश्यक परीक्षण निःशुल्क उपलब्ध है।

खून की कमी(एनीमिया) को हल्के में न लें-

यदि चिकित्सक द्वारा हीमोग्लोबिन कम बताया गया है अथवा सिकल सेल की पुष्टि होती है, तो इसे गंभीरता से लें। चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आयरन- फोलिक एसिड की गोलियां नियमित ले तथा हरी सब्जियॉं, गुड-चना एवं पौष्टिक आहार का सेवन करें। आवश्यकता पड़ने पर रक्त की व्यवस्था के लिए पहले से संभावित रक्तदाताओं के नाम में मोबाईल नंबर सुरक्षित रखें।

जोखिम वाली गर्भावस्था (लाल निशान) में प्रसव घर या छोटे अस्पताल में न कराएं-

कम उम्र, जुड़वा गर्भ, उच्च रक्तचाप, पूर्व में आपरेशन/सीजेरियन प्रसव अथवा अन्य चिकित्सकीय जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का प्रसव डॉक्टर की सलाह के अनुसार सीएचसी अथवा जिला चिकित्सालय, मेडिकल कॉलेज जैसे उच्च स्वास्थ्य संस्थान में कराया जाए। परिवार 108 का नम्बर सभी मोबाईल में सेव रखें। तथा प्रसव की संभावित तिथि से पहले आवश्यक परिवहन व्यवस्था की योजना बनाए । विशेष रूप से दूरस्थ एवं बरसात प्रभावित क्षेत्रों (पोंड़ी उपरोड़ एवं करतला) की गर्भवती महिलाओं का प्रसव से 07 दिन पूर्व अस्पताल के नजदीक आ जावें।

खतरे का 05 लक्षण दिखें तो तुरंत 108 पर संपर्क करें-

गर्भावस्था के दौरान तेज बुखार/दौरे, अत्यधिक रक्तस्त्राव, रक्तचाप(बीपी) बढ़ना, तेज सिरदर्द या ऑंखों के सामने धंुध /अंधेरा छा जाना, पानी की थैली फटना तथा बच्चे की हलचल कम या बंद होनेा जैसे खतरे के लक्षण दिखाई देने पर देरी न करें और तत्काल स्वास्थ्य संस्था से संपर्क कर 108 एंबुलेंस की सहायता लेकर अस्पताल लाएं।

प्रसव के 48 घंटे बेहद खतरनाक है-

प्रसव के बाद के 48 घंटै मां एवं नवजात दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए प्रसव के बाद मां को कम से कम 48 घंटे स्वास्थ्य संस्था में निगरानी में रखना आवश्यक है। उसके बाद घर आने के बाद भी बुखार , अत्यधिक रक्तस्त्राव, बदबूदार पानी अथवा अन्य असामान्य लक्षण दिखाई देने पर तत्काल स्वास्थ्य केन्द्र लेकर आयें।
कलेक्टर  कुणाल दुदावत एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एस.एन.केशरी ने जिले के आम नागरिको से अपील किए हैं कि गर्भवती महिला की देखभाल को परिवार प्राथमिक जिम्मेदारी मानते हुए प्रथम तीन महीने के भीतर पंजीयन, नियमित जांच, पौष्टिक आहार, चिकित्सकीय सलाह का पालन तथा आवश्यकता पड़ने पर तत्काल अस्पताल पहॅुचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें ।

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