
कोरबा -11 सितंबर कभी कच्चे मकान की दीवारों और टपकती छत के बीच गुजर-बसर करने वाली काशीनगर निवासी गुंजा साहू के लिए अपना पक्का मकान किसी सपने से कम नहीं था। सीमित आमदनी के कारण परिवार के लिए पक्का घर बनाना आसान नहीं था। बरसात आते ही छत से पानी टपकने लगता था। ऐसे में हर मौसम परिवार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होता था।श्रीमती गुंजा साहू अपने अनुभव साझा करते हुए कहती हैं, “पहले हमारा घर कच्चा था। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता था और दीवारों व फर्श में सीलन हो जाती थी। घर में बच्चों और परिवार के सदस्यों को लेकर हमेशा चिंता रहती थी। मिट्टी के घर में सांप-बिच्छू आने का डर भी बना रहता था। पक्का मकान बनाने की बहुत इच्छा थी, लेकिन परिवार की सीमित आमदनी में यह संभव नहीं हो पा रहा था। सीमित आय के बीच परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना ही प्राथमिकता थी। ऐसे समय में पीएम आवास शहरी 2.0 योजना उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर आई।
योजना के तहत आवास निर्माण के लिए उन्हें तीन किश्तों में लगभग 2.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। शासन से मिली सहायता और अपनी बचत की राशि को मिलाकर परिवार ने अपने पक्के मकान का निर्माण पूरा किया।अब बारिश में छत से पानी टपकने की चिंता नहीं रहती, न दीवारों और फर्श में सीलन की परेशानी है और न ही सांप-बिच्छुओं का डर सताता है। परिवार सुरक्षित माहौल में आराम से रह रहा है।”पक्का मकान मिलने के बाद केवल घर की तस्वीर ही नहीं बदली, बल्कि परिवार के जीवन में सुरक्षा, सुविधा और आत्मविश्वास भी बढ़ा है। जिस घर में कभी हर बारिश चिंता लेकर आती थी, आज वही पक्का आशियाना परिवार को सुकून और सुरक्षित भविष्य का भरोसा दे रहा है।
अपने अनुभव को व्यक्त करते हुए गुंजा साहू कहती हैं, “हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारा पक्के घर का सपना इतनी जल्दी पूरा होगा। आज अपने घर में परिवार के साथ बहुत खुशी और सुकून मिलता है। हमारे लिए यह घर बहुत बड़ी सौगात है। इसके लिए हम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और शासन के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हैं।”पीएम आवास शहरी 2.0 योजना के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों को केवल पक्की छत ही नहीं मिल रही, बल्कि उनके जीवन में सुरक्षा, सम्मान, स्थायित्व और बेहतर भविष्य की नई उम्मीद भी जुड़ रही है।






