शारदीय नवरात्र विशेष: 1996 में वैष्णो देवी से आई अखंड ज्योत, 30 साल से निरंतर प्रज्वलित, जानें इसकी ख्याति
हितवाद टाइम्स l 17 अक्टूबर 2026।।बिलासपुर। बिलासपुर जिले का जरहाभाटा चौक आज पूरे क्षेत्र में मंदिर चौक के नाम से जाना जाता है। यहां स्थित नव दुर्गा शक्ति पीठ मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि इसका इतिहास भी बेहद खास है। यह मंदिर उस दौर की याद दिलाता है, जब देश आजाद हुआ था और यहां आस्था का बीजारोपण हुआ था। नवरात्र के दिनों में इस मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। माता के दरबार में श्रद्धालु मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित कर अपनी मन्नत मांगते हैं। इस बार चैत्र नवरात्र में 1065 ज्योति कलश प्रज्वलित किए गए हैं।
1963 में हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित
पीपल के पेड़ के बढ़ने के साथ ही यहां लोगों की आस्था भी पनपने लगी। वर्ष 1963 में भक्तों ने यहां हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित की। तभी से इस मार्ग से गुजरने वाले राहगीर रुककर हनुमान जी की पूजा-अर्चना करने लगे। धीरे-धीरे यह स्थान भक्तों के लिए पूजनीय बन गया।
वैष्णो देवी से लाई गई अखंड ज्योत
वर्ष 1996 में ट्रस्ट के सदस्यों ने जम्मू-कश्मीर स्थित वैष्णो देवी मंदिर से पवित्र ज्योत लाकर यहां स्थापित की। तभी से मंदिर में अखंड ज्योत प्रज्वलित है। भक्तों का विश्वास है कि मां दुर्गा के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मन्नत अवश्य पूरी होती है। यही कारण है कि यहां वर्षों से श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा हुआ है और आज भी लोगों की आस्था कायम है।
नवरात्र में होती है विशेष रौनक
नवरात्र के दिनों में इस मंदिर की रौनक देखते ही बनती है। माता के दरबार को आकर्षक रोशनी और फूलों से सजाया जाता है। आसपास का पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल से सराबोर हो जाता है। नवरात्र शुरू होने से पहले ही श्रद्धालु मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित करवाने के लिए मंदिर पहुंचने लगते हैं।
भक्तों की मन्नतें पूरी होने की मान्यता
मां दुर्गा के दरबार में पहुंचकर श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति का अनुभव होता है। यहां हर वर्ग और हर उम्र के लोग दर्शन के लिए आते हैं। कोई अपने परिवार में सुख-समृद्धि की कामना करता है, तो कोई संतान प्राप्ति के लिए मन्नत मांगता है। भक्तों की मान्यता है कि मां दुर्गा अपने दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी करती हैं।
पूरे क्षेत्र में मंदिर चौक के नाम से प्रसिद्ध
आज इस मंदिर की ख्याति इतनी है कि पूरा क्षेत्र ही मंदिर चौक के नाम से जाना जाता है। सुबह से देर रात तक यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। नवरात्र के अलावा भी सालभर लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर मां दुर्गा के दरबार में आते हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां बैठकर उन्हें आत्मिक शांति और सुकून मिलता है।
आजादी की याद में लगाया गया था पीपल
नव दुर्गा शक्ति पीठ ट्रस्ट के अध्यक्ष ओंकार शाजवानी बताते हैं कि वर्ष 1947 में भारत की आजादी के जश्न और उसकी स्मृति में यहां पीपल का एक पेड़ लगाया गया था। उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि यह साधारण-सा पेड़ एक दिन आस्था का प्रतीक बन जाएगा।